प्रेम क्या है ?

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क्या प्रेम अँधा (नेत्रहीन) है??

प्रेम क्या है ?

प्रेम शांत है कोमल और मैत्रीकारक है, जहाँ तक मैं सोचता हूँ प्यार किसी को दुःख देने का नाम नही है.
प्यार मैं स्वयं का कोई मोल नही होता , प्यार आगे नही बढता बल्कि पीछे चलता है आपको “फोल्लो” करता है,
प्यार अभद्र नही हो सकता यह तो हमेशा साथ रहने की प्रेरणा देता है , हमेशा सबको खुश रहने की कामना करता है

सच्चा प्रेम ख़ुद के रस्ते बनाने के बजाये , अपना अधिकार बनाने के बजाय ख़ुद को हर रस्ते पर मोड़ देता है.
ये किसी भी बुराई का बदला बुराई से नही लेता बल्कि प्रेम भावना से अपना बना लेता है ….. बुराई को सिर्फ़ अपनी पीठ दिखता है

शांत और सच्चा प्यार हर चीज को स्वीकार करता है चाहे दुःख हो या सुख….. कितने भी कठिन परिस्थिति हो यह सिर्फ़ आशा रखता है ….. और उस आशा से ही सब कुछ पाता है…

सच्चा प्यार : जो कभी बुराई नही सोचता, कभी असफल नही होता, कभी रूकावट नही पैदा करता और उसका कभी अंत नही होता !

प्यार, प्रेम सारे रिश्तों में विद्यमान है …..
प्यार निश्चय ही अँधा नही हो सकता, अगर कही सटीक नजर है तो सिर्फ़ प्रेम मैं है… क्यूंकि प्रेम भावः मैं कोई भी सिर्फ़ अपने बारे मैं नही सोचता बल्कि सबका अच्छा सोचता है …..

There is nothing who can truly see except Love…..Love ignores a great deal, but it keeps in focus that one thing that transcends all else.

Love never fails. :)

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