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मैं कभी बतलाता नही
पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ,
यूं तो मैं , दिखलाता नही
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब है पता है न माँ
भीढ़ मैं यूं न छोडो मुझे
घर लौट के भी आ न पाऊँ माँ
भेज ना इतना दूर मुझको तू
याद भी तुझको आ ना पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ
क्या इतना बुरा , मेरी माँ.
जब भी कभी पापा मुझे
जो जोर से झूला झुलाते हैं माँ
मेरी नजर ढूंढें तुझे
सोचु यही तू आके थामेगी माँ.
उनसे मैं यह कहता नही
पर मैं सहम जाता हूँ माँ
चेहरे पे आने देता नही
दिल ही दिल मैं घबराता हूँ माँ
तुझे सब है पता है न माँ
तुझे सब है पता मेरी माँ
मैं कभी बतलाता नही पर …………
तुझे सब है पता मेरी माँ…………. मेरी माँ …….
२२ अप्रैल २००८ को इस देश से सात समंदर पार दूर देश “अमेरिका” को चल तो दिया पर काफी कुछ अधूरा सा लग रहा था…..
अपने प्यारे घर और देश से दूर जाकर, कुछ पाने की ख्वाहिश में, एक बहुत अनमोल और अतुल्य व्यक्तित्व “माँ” को इतना याद किया, जिसे में शायद शब्दों में बयां नही कर सकता…….
मै रोया यहां दूर देस वहां भीग गया तेरा आंचल
तू रात को सोती उठ बैठी हुई तेरे दिल में हलचल
जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है मां
सब ग़म ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है मां
जीवन का कैसा खेल है ये मां तुझसे दूर हुआ हूं मै
वक़्त के हाथों की कठपुतली कैसा मजबूर हुआ हूं मै
जब भी मै तन्हा होता हूँ, मां तुझको गले लगाना है
भीड़ बहुत है दुनिया में तेरी बाहों में आना है
जब भी मै ठोकर खाता था मां तूने मुझे उठाया है
थक कर हार नहीं मानूं ये तूने ही समझाया है
मै आज जहां भी पहुंचा हूँ मां तेरे प्यार की शक्ति है
पर पहुंचा मै कितना दूर तू मेरी राहें तकती है
छोती छोटी बातों पर मां मुझको ध्यान तू करती है
चौखट की हर आहट पर मुझको पहचान तू करती है
कैसे बंधन में जकड़ा हूँ दो-चार दिनों आ पाता हूँ
बस देखती रहती है मुझको आँखों में नहीं समाता हूँ
तू चाहती है मुझको रोके मुझे सदा पास रखे अपने
पर भेजती है तू ये कह के जा पूरे कर अपने सपने
अपने सपने भूल के मां तू मेरे सपने जीती है
होठों से मुस्काती है दूरी के आंसू पीती है
बस एक बार तू कह दे मां मै पास तेरे रुक जाऊंगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊंगा
माँ तेरी गोद मैं सर रखकर अब सोने को दिल करता है,
उस आँचल की छाँव मैं सब कुछ खोने को दिल करता है …..
उन अनकही बातों से भरी उन आँखों ने जब रोका था,
मुझको अब उन बातों को फ़िर सुनने को दिल करता है,
संसार की अभी आदरणीय माँओं को उनके इस निस्वार्थ त्याग के लिए सादर प्रणाम….




